5 Best Poets In Jabalpur You Can Book Online

76 / 100

1. Pandit Sanjay Tiwari ‘Saroj’ Poet in Keolari Seoni Jabalpur

best poet in jabalpur

Sanjay Saroj Tiwari is the best poet in Jabalpur, essayist and patriot. Sanjay Saroj Tiwari was born on 23 September 1970. And he’s one of the poem veer rasa also honours by the Jabalpur Poets Union . Sanjay Tiwari is also considered as the most important best poet in Jabalpur. And the regular poet of Hindi Kavi sammelan and applaud and connected by Pushkin and Russian poetry lovers for Hindi speakers.

Biographer, He is a true patriot is well known modern Hindi poets. He’s a well-known poet of revolution on account of his nationalist poetry written in the days before Independence of India. He wrote several famous poetry exuded veer rasa and has been hailed as (“ poet”) on account of his inspiring patriotic compositions.

पं संजय तिवारी “सरोज “

1.काहे का शोर है…

काहे का शोर है ,राम कहीं और हैं |

धरती न आकाश में ,

भूख में न प्यास में |

राम श्वास -श्वास में ,

रमते हैं विश्वास में ||

बस एक चितचोर है ,

थामे जो धर्म डोर है ||राम

रूप न श्रृंगार में ,

न जलते अंगार में |

न गंग -जमुन धार में ,

न वेद के विस्तार में ||

मुस्कराए जो प्यार में ,

देखो चहुओर है ||राम

आँगन न गाँव में ,

न केवट की नाव में |

न शास्त्र के प्रभाव में ,

न उपवन की छाँव में ||

रहे भक्ति भाव में ,

जग के सिरमौर हैं ||राम

न फूल ,फल ,कंद में ,

न गीत ,ग़ज़ल ,छंद में |

न काव्य के प्रबंध में ,

न योग के अनुबंध में ||

राम तो स्वच्छंद है , जहाँ प्रेम पोर -पोर है ||राम

2.राष्ट्र के हित मे…

राष्ट्र के हित मे लिखेंगे, हम नया इतिहास कोई

गीत बलिदानो का गायगी, धड़कती श्वास कोई |

आँधियो का जोर, तुफानो का साया साथ है

टिमटिमाते दीप ओर छाई अंधेरी रात है |

पर कदम चूमेंगे मंज़िल कह रहा विश्वास कोई,

राष्ट्र के हित मे लिखेंगे हम नया इतिहास कोई

हर तरफ दुश्मन खड़े है, हर तरफ संग्राम है

सैंकड़ो रावण से लड़ते एक अकेले राम है

राम जीतेंगे समर, कहता है तुलसीदास कोई

राष्ट्र के इतिहास मे लिखेंगे हम नया इतिहास कोई |

अलगाव के पथराव  से, एकता घायल हुई है

अश्मिता अब राष्ट्र की, झटपटाती सी हुई है

वेदना माँ भारती की, ना कर रहा एहसास कोई

राष्ट्र के  हित मे लिखेंगे हम नया इतिहास कोई |

स्वधर्म पर है धर्म संकट, झूठ, छल, प्रपंच हॅसते

देशद्रोही मुखर होकर, अखंडता पे तंज़ कसते

षड़यंत्र सारे विफल कर दे, ऐसा करें प्रयास कोई

राष्ट्र के हित मे लिखेंगे हम नया इतिहास कोई |

आपसी सोहार्द, सदभाव परस्पर देश हित हो

मन वचन ओर कर्म से राष्ट्र आराधन विदित हो

एक स्वर मे गूंज उठे, संस्कृति अनुप्रास कोई

राष्ट्र के  हित मे  लिखेंगे हम नया इतिहास कोई |

विघ्न -संतोषी, अराजक, ताकतों का दम घुटे अब

मुखर हो जनचेतना   आतंक का मर्दन करें  अब

प्रति पल समर्पण त्याग का, करें योगाभ्यास कोई 

राष्ट्र के हित मे लिखेंगे हम नया  इतिहास कोई |

3.दोस्तों से सलामों दुआ कीजिये

 दोस्तों से सलामो   दुआ कीजिये ,

दुश्मनो से भी गम में मिला कीजिये |

घाव पर घाव करने से क्या फायदा

जख्म मरहम से भरते रहे हैं सदा

छोड़ नफरत को ,ले ज़िन्दगी का मज़ा

अब शुरू प्यार का सिलसिला कीजिये

दोस्तों से सलामों   दुआ कीजिये

जिंदगी जो मिली है बसर के लिए

मौज मस्ती सुहाने सफर के लिए

न दिमागों में जिद का जहर घोलिये

इंसा होने का दमखम दिखा दीजिये

दोस्तों से सलामों   दुआ कीजिये

आग से आग बुझती नहीं है सुना

दिल पसीजे तो होती महुब्बत जबां

इल्तज़ा ये फ़कत मान ले रहनुमा

कौम को ये भरोसा दिला दीजिये

दोस्तों से सलामो  दुआ कीजिये

यार नफरत की सीमा न हद पार हो 

सबके दिल में मुहब्बत का संसार हो

बात ही बात में अब न तकरार हो

बीती बातो को मन से भुला दीजिये

दोस्तों से सलामो दुआ कीजिये                            

दुश्मनों से भी ग़म में मिला कीजिए

4.है नमन आज रणवीरों को…

है नमन आज रणवीरों को ,

आज़ादी के उन हीरों को ||

             जो रण में शस्त्र अमोघ बने ,

             जो प्रणपालक उदघोष बने ,

             आज़ाद भगतसिंह बोस बने |

             सब कालजयी उन वीरों को ,

             आज़ादी के उन हीरों को ||है नमन

जो भीषण भीष्म प्रतिज्ञा बन ,

कर डाले अर्पण तन मन धन ,

जो करते क्षण में शत्रु दलन |

वो सफल सकल शमशीरों को |

आज़ादी के उन हीरों को ||है नमन

               राणा का भाला बन बैठे ,

               जुगनू से ज्वाला बन बैठे ,

               गौरव की माला बन  बैठे |

               उन चंदन से सने अबीरों को |

                आज़ादी के उन हीरों को ||है नमन

जो तिलक लगाकर माटी का ,

यश गाते ,हल्दी घाटी  का ,

जो रक्त पिए रिपु -छाती का |

अचूक लक्ष्य हर तीरों को |

आज़ादी के उन हीरों को ||है नमन

               जो युद्ध पर्व में सार्थ बने ,

               हम सब के हित परमार्थ बने ,

               जो भाव कुशल शब्दार्थ बने |

               गुँजित स्वर गंध समीरों को |

                आज़ादी के उन हीरों को ||है नमन

आदर्श बने रघुनंदन से ,

कर मुक्त दिए रिपु बंधन से ,

उन्हें याद करे ,कर वंदन से |

पुण्यात्मा दिव्य शरीरों को ||

आज़ादी के उन हीरों को ||है नमन

                  जो बाना वीर शिवा का धर ,

                  रिपु -मर्दन करते ,जीत समर ,

                   उस समय काल जाता था ठहर |

                  अभिनंदन उन रणवीरों को |

                  आज़ादी के उन  हीरों  को ||है नमन

बन झाँसी वाली रानी सी ,

रण कौशल अजब कहानी दी ,

पद्मनियों ने स्वं जवानी दी |

यौवनयुत विपुल प्राचीरों को |

आज़ादी के उन  हीरों को ||है नमन

                    जो प्राण दिए ,हँसते हँसते ,

                    जो झूल गऐ ,फाँसी  तख़्ते ,

                    जो जन -जन के दिल में बसते |

                     ऐसे अल मस्त फकीरों को |

                     आज़ादी के उन  हीरों  को ||है नमन

हम ऋणी हैं ,वीर शहीदों के ,

बलिदानी अमर  हमीदों  के ,

धर दीप जला , उम्मीदों के |

हम भूले न कभी नज़ीरों को |

आज़ादी के उन हीरों  को ||है नमन

 कर दिए समर्पित खुद रण में ,                       

निज वैभव त्याग दिए क्षण में ,

5.शिलालेख…

तुम्हारी यादें शिलालेख हैं

तुम्हारी यादें शिलालेख हैं ,

मेरे मानस के प्रस्तर की |

तुम भोली भाला बाला हो,

विंध्यांचल की या बस्तर की||

बल  खाती इठलाती ऐसे ,

लहरें ज्यों हों रेवा जल की |

प्रथम मिलन में मुझे लगा यूँ ,

तुम्ही स्वामिनी ह्रदय पटल की ||

जीवन के मंगल प्रभात में ,   

तुम हो उषा किरण कल्याणी |

आँचल में सतपुड़ा संजोए ,

यश गाती है मेकल वाणी ||

झलके यौवन खजुराहो सा ,

ताज अजंता चितवन चितवन |

धुआँधार सा धवल आवरण ,

हरित श्यामली उन्मन तनमन ||

आभा युत यह देह शोष्ठ्वी ,

नगरी भली भिलाई लगती |

केशराशि कान्हा की वनश्री ,

रोम रोम तरुणाई रचती ||

छत्तीसगढ़ के संस्कार हैं ,

और सभ्यता बुंदेली है |

रस .माधुर्य मालवी जैसा ,

बाँकी बनक बघेली सी है ||

अल्हड़ता है महाकौशली ,

और सादगी भोपाली है |

रीवा ,सतना ,सीधी वाली ,

चूंनर की घूँघट डाली है ||

मैहर की तुम शक्ति शारदा ,

चित्रकूट की जपी तपी हो |

महाकाल ओंकारेश्वर की ,

तुम्ही पुण्य साधनी मही हो !||

चौरागढ़ का तुम आराधन ,

तुम्ही प्रार्थना गिरजाघर की |

मस्जिद में अजान तुम्ही हो ,

तुम्ही आरती झोतेश्वर की ||

6.क्या हाल हुआ आज़ादी का…

क्या हाल हुआ आज़ादी का

             जुम्मन की बूढ़ी खाला सी

             चुभती आँखों में भाला सी

             बिन खुश्बू वाली माला सी

                      क्या हाल हुआ आज़ादी का

संसद में गूँगी -बहरी सी

टीस लिऐ है   गहरी सी

गर्मी में भरी दुपहरी सी

                      क्या हाल हुआ आज़ादी का

             हाथों को मिलता काम नहीं

      &nbs